पण्डित श्री कैलाश चन्द्रजी
जन्म – सन 1913 या 1916 में हुआ ।
माता का नाम – श्रीमति भरतो देवी जैन ।
पिता का नाम – श्री मिटठनलाल जैन (निवासी टीकरी पहले जिला मेरठ अब जिला बागपत ।)
भाई – बड़े भाई वाबुरामजी पहले अम्बाला बाद में दिल्ली में रहने लगे।
छोटे भाई – शीलसागरजी पहले सहारनपुर बाद में हैदराबाद रहने लगे।
बहिनें – बड़ी – जैनमति
छोटी – शील मति (इनके पति सरनाराम जी के भाई थे)
शिक्षा – मथुरा चौरासी में 3 वर्ष पश्चात सहारनपुर के जम्बू विद्यालय में।
व्यापार – पहले दिल्ली फिर लाहौर पश्चात् देश विभाजन के कारण बुलंदशहर में आकर आजाद किराना स्टोर्स नाम की दुकान खोली।
आजीवन ब्रम्हचर्य – सन् 1953 में यात्रा संघ में जब पावागढ़ में आजीवन ब्रम्हचर्य अंगीकार किया जिसे गिरनार तीर्थ आने पर फिर से दोहराया।
गुरुदेव श्री से परिचय – सन् 1953 में यात्रा संघ में जब अहमदाबाद पहुंचे तब कुछ लोग कानजी स्वामी को महान संत और कुछ लोग धोखा कहने लगे तब आपको लगा कि कानजी स्वामी अवश्य महान संत हैं मुझे उनसे मिलना चाहिए।
पहली बार प्रवचन सुनकर गुजराती भाषा होने से कुछ भी समझ नहीं आया तथापि यह लगा कि जिसकी मुझे तलाश थी वह मुक्ति विधाता मुझे मिल गए हैं।
* सोनगढ़ में रात को 12 बजे सोते एवं 3 बजे उठकर स्वाध्याय करते और अन्य चार (4) बजे उठाकर कक्षा लेते ।
निवृत्ति – 16 अप्रैल 1965 को दुकान का संपूर्ण दायित्व श्री शीतल प्रसाद जैन को संभालकर आपने तत्व प्रचार हेतु संपूर्ण देश का भ्रमण किया।
