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ब्र.धन्य कुमार वेलोकर
पिता का नाम – बालाजी
जन्म तिथि –  १९३२ डासाला-बुलढाना
गुरुदेव का संपर्क –  १९६०, गिरनार पर्वत पर सिद्धचकरमंडल विधान के समय बाबुभाईजी से परिचय हुआ | माताजी पिताजी वर्ष में 3 माह सोनगढ़ में रहते थे | व्याज एवं किसानी का काम था । २००० एकड़ भूमि के मालिक थे पिताजी | नानाजी विद्वान थे | मा के घर में तेरह पंथी शुद्धानाय के संस्कार थे |
शिरपुर पंचकल्याणक में गुरुदेव पधारे थे | द्रव्य संग्रह ग्रन्थ गुजराती में रामजी भाई की टीका पड़कर काफी शंकाए समाधान हुई बाद में हरिश्चन्द्र नाम के ६ठे न.
के भाईने प्रवचनसार जी सोनगढ़ का छपा दिया जिसमे पहली बार गुरुदेव का फोटो देखा | इंदौर में पिताजी के साथ सर सेठ हुक्म चन्द्र जि की स्वाध्याय सभा में जहाँ ८ विद्वानों के बीच में सेठजी स्वयम स्वाध्याय करते थे | हिंदी का गयान होने से शिविर लगा तब खेमजी भाई एवं मास्टर धर्म चन्द्र के साथ आपको भी पढाने भेजा था | जैन सिद्धांत प्रवेशिका की कक्षा बोर्ड पर लेते थे लोगों को बहुत लाभ हुआ था | कई वर्षों तक प्रवचन करने भी गये ।
समाज सेवा –  १९९२ से गज्पंथा संभाला इससे पहले आपके बड़े भाई देखते थे । शिरपुर एवं गजपंथा के मुकद्दमे भी आपने देखे । मुमुक्षु महा संघ में भी आप कार्य करते हैं। तीर्थ सुरक्षा ट्रस्ट, प्राचीन क्षेत्रों की खोजबीन, संग्रहालय आदि बनाना आपकी प्रिय होबी है।
ब्रह्मचर्य – पिताजी आ.शान्ति सागर जि के संपर्क में थे। साथ ही आ. समन्तभद्र के सानिध्य से स्वाध्याय का लाभ मिला १० भाई होने से आचार्य श्री एक बेटे को दान देने की बात करते थे | तब मैंने ससार की रूचि ण होने से मैंने कुन्थल गिरी में ब्र. लिया | 3 साल कुम्भोज में विद्यालय संभाला |