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अभयकुमार जैन ‘शास्त्री’ देवलाली
 माता पिता का नाम –  भूरी बाई-फूल चन्द्र जैन
भाई बहिन –  ५ बहिन 3 भाई सभी में धर्म के संस्कार
पत्नी – श्रीमती
सन्तान  – गयायक, अनुभूति, श्रद्धा
शिक्षा – रांझी-जबलपुर में प्राथमिक एवं जबलपुर से आगे की शिक्षा, एम. काम, शास्त्री

व्यवसाय –  स्मारक में १० वर्ष मेनेजर-अध्यापन, अब स्वतंत्रता से लेखन, पठन- पाठन, प्रवचन | मंच संचालन, सम्पादन, प्रतिष्ठाचार्य, भक्ति साहित्य एवं संगीत को नई दिशा दी।

संस्कार –  एकाशन, बाजार का न खाना-पीना, भजन लिखना १२ वर्ष की उम्र से, मंझले मामा के साथ पहली वार सोनगढ़ गये । २ वर्ष बाबुभाई जि के साथ तीर्थ सुरक्षा ट्रस्ट के पत्राचार धर्म प्रचार में रहे। १९७६ में स्मारक के प्रथम बेच के गोल्ड मेडलिष्ट रहे। यहाँ की प्रथम रचना ‘धन्य -२ वीतराग वाणी अमर तेरी जग में कहानी’ लिखी।
साहित्य सेवा  – स्वतंत्र कृति –  1 क्रिया परिणाम और अभिप्राय, 2 क्रमबद्ध पर्याय निर्देशिका,3 नयरहस्य।
गुरुदेव श्री का परिचय – १९६८ में करेली निवासी मामाजी पन्नालाल जी एवं पूज्य माताजी भूरी बाई की प्रेरणा से सोनगढ़ जाना हुआ । इस समय बाल शिविर लगा हुआ था।