हमारे जिनवरत्रय
भरतक्षेत्र के वर्तमान चौबीस तीर्थंकर और विदेहक्षेत्र के विहरमान बीस तीर्थंकर हमारे जिनवर हैं। वैसे तो हम भूत और भविष्य के चौबीस तीर्थंकरों को भी याद करते हैं मगर इन सभी में से हम पर तीन जिनवरों का विशेष उपकार है। वे हैं भगवान महावीर, पार्श्वप्रभु और सीमंधर स्वामी। वैसे तो सभी तीर्थंकरों का प्रतिपादन समान ही होता है परन्तु भगवान महावीर हमारे शासन नायक हैं वे 2600 साल पहले ही हो गए और उनकी देशना आगम के माध्यम से हम तक पहुंची है इसलिए वे हमारे उपकारी हैं।
सीमंधर स्वामी विदेहक्षेत्र में विराजमान है उनके समवशरण में दिव्य देशना निरंतर प्रवाहित हो रही है। हमारे परमगुरु कुन्दकुन्द आचार्य देव को सदेह वहां जाना हुआ और कलान्तरित आगम में आई अनेक क्षतियों को सीमंधर भगवान की देशना के माध्यम से दुरुस्त किया। हमारे अपर गुरु कानजीस्वामी और प्रेरणादयी चम्पा बहनश्री वहां से प्रभु की दिव्य देशना का सुनकर आए और आचार्य कुंदकुंद के मार्ग का अनुसंधान किया। पार्श्वप्रभु महावीर भगवान के 150 साल पहले ही हुए और उनका प्रभाव पूरे भारतवर्ष में देखा जाता है। वे वीतरागता की मिशाल बने हुए हैं, क्योंकि इतने उपसर्ग के बावजूद वे अपनी साधना से चलित नहीं हुए और केवलज्ञान लेके ही उठे।

