आदरणीय बाबू जुगल किशोर जी
जन्मतिथि एवं ग्राम – 5 अप्रैल 1924 को राजपूताना के प्रांतस्थ कोटा स्टेट के कुंजेड निजाम के छोटे से ग्राम खुरी (जिला – बांरा ) राजस्थान के एक पोरवाल उज्जवल धवल गोत्रीय एक वैष्णव परिवार में हुआ था | 3 वर्ष की उम्र में देवीलाल अल्प शिक्षित कानाबाई निरक्षर( 90 )वर्ष दिगंबर जैन परिवार में दस्तक पुत्र बनकर आए थे |
अवसान को में 30 सित.2015 को |
माता-पिता – केसर बाई श्रीमान राम प्रताप बारां, एक बहन तीन भाई रामकिशोर |
शिक्षा – 1942 में मैट्रिक में इंटर हर्वर्ट कॉलेज कोटा में 1942 में प्रवेश लिया लेकिन स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के कारण पढ़ाई छूटा दी | साहित्य एवं व्यापार विशारद कर लिया | साहित्य रत्न जैन धर्मविशारद एम. ए. हिंदी एवं इंग्लिश लिटरेचर से शिक्षा प्राप्त की | एम. ए. हिंदी एवं इंग्लिश लिटरेचर से प्राप्त की |
पत्नी का नाम – 18 वर्ष की उम्र में स्थानकवासी श्रीमती रतन देवी (अल्प शिक्षित) से शादी के बाद में साहित्य विशारद तक शिक्षा की |
पुत्र – चिन्मय जैन, पत्नी आनन्द धारा झांझरी, व्यवसायरत कोटा | चिदात्म, चिरंतन
पुत्री – शशिप्रभा-हर्षवर्धन औरंगाबाद , अर्चना-प्रदीप झांझरी उज्जैन, कुमारी ब्रह्मचारी नीलिमा
रचना – 16 वर्ष की उम्र में कविता सुनकर आश्चर्य होता था | 15 वर्ष की उम्र में काव्य लिखने लग गए थे 1950 में आत्म धर्म पत्रिका मिली जिससे लगा कि भगवान आत्मा कहने वाला कौन है..? श्रावण मास में बाबू ज्ञान चंद्र जी के साथ प्रथम बार सोनगढ़ आए | लौटते समय रेल की वर्थ पर केवल रवि करने वाली देव शास्त्र गुरु पूजा के अष्टक लिखे थे | देश भक्ति के अनेक कार्यक्रम, कवि सम्मेलन, आधुनिक कवियों के काव्य संग्रह, चैतन्य वाटिका, सिद्ध पूजन, चैतन्य की चहल-पहल, कालजयी रचनाएं हैं, आपकी रचनाओं पर सुमित्रानंदन पंत, महादेवी एवं जयशंकर प्रसाद जैसा छायावादी कवि का प्रभाव दिखता है |
पंडित बनारसी दास जी का व्यक्तित्व एवं कृतित्व राजस्थान विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम में शामिल की गई |
सम्मान समारोह – अखिल भारतीय मुमुक्षु समाज द्वारा जून 2002 कोटा में हुआ था |
