
प्रतिष्ठाचार्य पंडित चंदूभाई
प्रतिष्ठाचार्य पंडित चंदू भाई (मांडले, ग्राम वर्मा) का पूज्य गुरुदेव श्री कांजी स्वामी द्वारा प्रवर्तित जैन धर्म की प्रभावना में अत्यंत महत्वपूर्ण और समर्पित योगदान रहा है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन तत्व प्रचार और जिनशासन की सेवा में अर्पित किया।
पंडित जी एक कुशल प्रतिष्ठाचार्य थे। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सवों का उन्होंने कुशलतापूर्वक संचालन किया। उनके सानिध्य में हुई प्रतिष्ठाओं ने न केवल भव्यता पाई, बल्कि मुमुक्षु समाज में आध्यात्मिक चेतना का संचार भी किया । वे गुरुदेव श्री के सिद्धांतों (निश्चय-व्यवहार का सुमेल और वस्तु स्वरूप) के गहरे जानकार थे। उन्होंने सरल और सुबोध भाषा में दिगंबर जैन धर्म के गूढ़ रहस्यों को जन-मानस तक पहुँचाया। उनकी शैली तार्किक और आगम सम्मत थी, जिससे श्रोताओं के हृदय में तत्व के प्रति गहरी रुचि जागृत होती थी। पंडित चंदू भाई, गुरुदेव श्री कांजी स्वामी के अनन्य भक्तों में से एक थे। जिस समय गुरुदेव श्री के सिद्धांतों का विरोध हो रहा था, उस समय उन्होंने अडिग रहकर उनके सिद्धांतों का समर्थन किया और ग्राम-नगर जाकर “दिगंबर जैन धर्म” की शुद्ध प्रभावना की। ग्राम वर्मा (मध्य प्रदेश) और आसपास के क्षेत्रों में उन्होंने स्वाध्याय की परंपरा को जीवित रखा। छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और अनेक युवाओं को संयम और स्वाध्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
वे केवल क्रियाकांड तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने आगम ग्रंथों के पठन-पाठन पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कई शिविरों के माध्यम से समाज को यह सिखाया कि क्रिया के साथ-साथ परिणामों की शुद्धि और सम्यक दर्शन कितना अनिवार्य है। पंडित चंदू भाई जी का व्यक्तित्व सादगी और विद्वत्ता का संगम था। उनकी निस्वार्थ सेवा ने दिगंबर जैन समाज में गुरुदेव श्री की प्रभावना को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं।
