
पंडित राजेंद्र कुमार जी (जबलपुर) का नाम गुरुदेव श्री कानजी स्वामी द्वारा पुनर्जीवित किए गए अध्यात्म मार्ग में बहुत सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने महाकौशल क्षेत्र (विशेषकर जबलपुर) में तत्वज्ञान की ज्योति जलाने में अग्रणी भूमिका निभाई।
पंडित जी के प्रयासों से जबलपुर मुमुक्षु मंडल का एक प्रमुख केंद्र बना। उन्होंने वहां नियमित स्वाध्याय, तत्व चर्चा और सभाओं का आयोजन किया, जिससे स्थानीय समाज गुरुदेव के ‘निश्चय नय’ और ‘समयसार’ के मर्म से परिचित हो सका।
गुरुदेव श्री की उपस्थिति में या उनके बताए मार्ग पर चलने वाले विद्वानों के सान्निध्य में होने वाले ‘शिक्षण शिविरों’ के प्रबंधन और संचालन में पंडित जी का विशेष कौशल था। उन्होंने युवाओं को जैन दर्शन की ओर मोड़ने के लिए कई कार्यशालाएं आयोजित कीं।
पंडित जी की विशेषता यह थी कि वे आगम (शास्त्रों) के गहरे जानकार थे। उन्होंने कानजी स्वामी के आध्यात्मिक संदेशों को शास्त्र सम्मत प्रमाणों के साथ प्रस्तुत किया, जिससे समाज में फैली भ्रांतियों का निराकरण हुआ और ‘प्रभावना’ (धर्म का प्रभाव) बढ़ा। उन्होंने बिखरे हुए मुमुक्षुओं को एक सूत्र में पिरोने और धार्मिक संस्थानों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जबलपुर में दिगंबर जैन मुमुक्षु मंडल की मजबूती के पीछे उनकी निस्वार्थ सेवा और संगठनात्मक शक्ति रही है। पंडित राजेंद्र कुमार जी जैसे विद्वानों की सबसे बड़ी प्रभावना यह रही कि उन्होंने ‘वस्तु स्वरूप’ को क्रियाकांड से ऊपर उठकर आत्मा के अनुभव से जोड़ने पर बल दिया, जो कि गुरुदेव श्री का मूल संदेश था।
