
आपका जन्म राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर में 26 नवंबर 1976 को हुआ | बचपन से ही धार्मिक संस्कारों में पहले बड़े डॉक्टर गोधा आज एक निर्भीक अंतरराष्ट्रीय जैन विद्वान थे |
शिक्षा- आप इतिहास एवं जैन विद्या व तुलनात्मक धर्म दर्शन विषयों में एम. ए., जैन दर्शन विषय से एम.फिल (गोल्ड मेडल) यू.जी.सी.- नेट तथा तीन लोक विषय पर पी.एच.डी की है |
देश विदेश की समाज एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा आपको समय-समय पर विविध अवार्ड, सम्मान पुरस्कार, एवं उपाधियों से अलंकृत किया गया है जिनमें अखिल भारतीय दिगंबर जैन विद्वत परिषद द्वारा पंडित प्रवर टोडरमल पुरस्कार व युवा विद्वत रत्न,श्रावण बेलगोला ( महामस्ताकाभीषेक ) युवा सम्मेलन में आदर्श जैन युवा राष्ट्रीय सम्मान शिकागो (अमेरिका) द्वारा अति विशिष्ट सेवा अवॉर्ड, उत्तर प्रदेश जैन विद्या शोध संस्थान लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार व फिरोजाबाद सहित ब्रज क्षेत्र की सकल जैन समाज द्वारा आध्यात्मचक्रवर्ती, श्री परमागम ट्रस्ट सोनागिर द्वारा आध्यात्म वेत्ता, ब्राह्मी सुंदरी कन्या विद्या निकेतन सहित दिल्ली की अनेक संस्थाओं द्वारा उपाध्यायकल्प आदि उपाधि सहित, आचार्य समंतभद्र पुरस्कार, युवा जैन रत्न सम्मान, कुंदकुंद ज्ञानपीठ द्वारा अर्हत्वचन पुरस्कार, डॉ हुकुमचंद भारिल्ल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा विशेष सम्मान आदि प्रमुख हैं |
आपके द्वारा लिखित एवं संपादित 13 पुस्तक एवं 30 से अधिक लेख प्रकाशित हो चुके हैं | आप 1998 से वीतराग विज्ञान मासिक के सह संपादक एवं पाक्षिक कक्षायें लेते रहे हैं | आप जयपुर के ऐतिहासिक मंदिर श्री दिगंबर जैन पंचायत तेरापंथ बड़ा मंदिर (टोडरमल जी वाला मंदिर) के महामंत्री श्री टोडरमल दिगंबर जैन सिद्धांत महाविद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक, जैन आध्यात्म एकेडमी ऑफ़ नॉर्थ अमेरिका के डायरेक्टर, विश्व स्तर पर संचालित अर्हम व सत्पथ पाठशाला के निदेशक एवं अखिल भारतीय जैन युवा फैडरेशन राजस्थान के प्रदेश मंत्री रहे हैं |
आप एक लोकप्रिय प्रवचनकार के रूप में विख्यात आध्यात्मिक प्रवक्ता थे, आपकी सरल, सुबोध,ओजस्वी, शैली समाज में आकर्षण का विषय बनी रही | आप पूरे विश्व में सर्वाधिक ऑनलाइन लाइव सुने जाने वाले जैन विद्वान थे | आप 1993 से नियमित प्रवचन करते हुए अंतिम समय तक लगभग 28000 से अधिक प्रवचन कर चुके हैं | सन 2011 से प्रतिवर्ष लगभग दो महीने विदेशों में जैन धर्म के प्रचार प्रसार हेतु बुलाए जाते रहे हैं | सन 2022 तक 18 विदेशी यात्राओं में अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, अफ्रीका, सिंगापुर, आस्ट्रेलिया, दुबई, आदि अनेक देशों के लगभग 40-50 शहरों में अपने प्रभावक प्रवचनों के माध्यम से धर्म ध्वजा फहरा चुके हैं |
जैन दर्शन के प्रखर विद्वान डॉ. संजीव गोधा का पूज्य गुरुदेव श्री कानजी स्वामी द्वारा प्रतिपादित वीतराग विज्ञान और तत्वज्ञान की प्रभावना (प्रचार-प्रसार) में अतुलनीय योगदान रहा है। उन्होंने विशेष रूप से युवा पीढ़ी को अध्यात्म से जोड़ने और कठिन सिद्धांतों को आधुनिक व तार्किक शैली में समझाने का कार्य किया।
डॉ. संजीव गोधा ने प्राचीन जैन ग्रंथों (जैसे समयसार, प्रवचनसार, मोक्षमार्ग प्रकाशक) के गूढ़ रहस्यों को अत्यंत सरल, सुबोध और तार्किक भाषा में प्रस्तुत किया। उन्होंने जटिल विषयों को समझाने के लिए 3D प्रेजेंटेशन और ग्राफिक्स का उपयोग किया, जिससे सिद्धांतों को समझना आसान हो गया।
प्रवचन: उन्होंने अपने जीवनकाल में 28,000 से अधिक प्रवचन दिए।
देश-विदेश की यात्रा: उन्होंने भारत के साथ-साथ अमेरिका (JAINA), कनाडा, इंग्लैंड, केन्या, और दुबई जैसे 18 से अधिक देशों में जाकर गुरुदेव श्री के संदेश को फैलाया। उनके हज़ारों प्रवचन YouTube पर उपलब्ध हैं, जो आज भी लाखों मुमुक्षुओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
उन्होंने ‘वीतराग विज्ञान पाठमाला’ के संपादन और ‘जैन पाठ प्रदर्शक’ जैसी पुस्तकों के माध्यम से बच्चों और युवाओं में धर्म के संस्कार डालने का कार्य किया। वे उत्तरी अमेरिका की जैन आध्यात्मिक अकादमी (JAANA) के निदेशक भी रहे।
वे ‘वीतराग विज्ञान’ पत्रिका के संपादक रहे और सुनिश्चित किया कि यह ज्ञान नियमित रूप से पाठकों तक पहुँचे।
लेखन: उन्होंने 17 से अधिक पुस्तकें और 50 से अधिक शोध पत्र लिखे, जो जैन दर्शन की गहराई को प्रमाणित करते हैं।
मात्र 46 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने जो धर्म प्रभावना की, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने अपना पूरा जीवन “आत्मा की प्रभावना ही सच्ची प्रभावना है” के सिद्धांत पर चलते हुए वीतरागी जिनशासन की सेवा में समर्पित कर दिया।
“डॉ. संजीव गोधा का मानना था कि सच्चा आराधक ही सच्चा प्रभावक होता है। उन्होंने पहले स्वयं की आराधना की और फिर उस रत्नत्रय के तेज से जगत को प्रकाशित किया ।”
